बुडगेल टप्पा रेंज,वनों की दुर्दशा: आग, अवैध कटाई और प्रशासन की नाकामी
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रोशन लाल अवस्थी की कलम से
वन दिवस पर वनों की दुर्दशा: आग, अवैध कटाई और प्रशासन की नाकामी बुडगेल टप्पा रेंज, 21 मार्च: जहां एक ओर पूरे विश्व में वन संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वन दिवस मनाया गया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के बुडगेल टप्पा रेंज में जंगलों की भयावह स्थिति ने इस दिवस के औचित्य पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
जंगल में भीषण आग, पुलिस ने बुझाई, वन विभाग रहा नाकाम
बुडगेल टप्पा रेंज के क्षेत्र क्रमांक 1229 में इंदागांव थाना के ठीक सामने अचानक भयंकर आग भड़क उठी। आग इतनी तेज थी कि अगर यह सड़क पार कर जाती, तो आसपास के इलाकों में भारी तबाही मच सकती थी। स्थानीय पुलिसकर्मी, जो आमतौर पर ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करते, आग की गंभीरता को देखते हुए खुद ही बुझाने में जुट गए। बाल्टियों में पानी भर-भरकर लाया गया, और कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया गया।
आधुनिक तकनीकें बेअसर, फिर भी आग क्यों नहीं रोकी गई?
वन विभाग दावा करता है कि जंगलों की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट सर्विलांस और अत्याधुनिक कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी आग लगने के बावजूद वन विभाग के कर्मचारी समय पर हरकत में क्यों नहीं आए? यह लापरवाही वन संरक्षण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
8 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक, वन्यजीवों का भारी नुकसान
हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान यह सामने आया कि करीब 8 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला जंगल पूरी तरह जल चुका है। बड़े-बड़े वृक्ष राख में तब्दील हो गए, और छोटे जीव-जंतुओं का भारी नुकसान हुआ। यह केवल एक पर्यावरणीय क्षति नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम के लिए खतरे की घंटी है।
अवैध लकड़ी तस्करी जोरों पर, प्रशासन बेखबर
जब हम जंगल के और अंदर गए, तो स्थिति और भयावह दिखी। इन्दगांव थाने से मात्र 50 मीटर दूर बहुमूल्य पेड़ों को कुल्हाड़ी से काट दिया गया था। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, जो सैटेलाइट निगरानी के दावे करता है, थाना से केवल कुछ कदमों की दूरी पर कीमती पेड़ों की तस्करी के लिए कटाई कर दी गई। इससे यह साफ होता है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी डर के अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।
150 से अधिक पेड़ काटे गए, लकड़ी चोरी के बाद आग लगाई गई?
जब हमने जंगल के भीतर जाकर निरीक्षण किया, तो पाया कि रोड से मात्र 10-15 मीटर की दू कीरी पर लगभग 100-150 पेड़ काटे जा चुके थे। कटे हुए पेड़ों के अवशेषों को जलाने के निशान भी दिखे, जिससे यह संदेह गहरा हो जाता है कि आग प्राकृतिक नहीं, बल्कि तस्करी के सबूत मिटाने के लिए लगाई गई थी।
क्या यह आग प्राकृतिक थी या सोची-समझी साजिश?
इस साल जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि यह आग प्राकृतिक कारणों से लगी है या यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। वन विभाग को इसकी गहन जांच कर यह सुनिश्चित करना होगा कि तस्करों की साजिशों पर तत्काल रोक लगे।
वन विभाग की नर्सरी भी बदहाल, पौधों की दुर्दशा
वन संरक्षण के नाम पर वन विभाग ने धुर्वागुड़ी में एक नर्सरी बनाई है, जहां नए पौधे तैयार किए जाते हैं। लेकिन वहां की स्थिति भी दयनीय है—कई पौधे पानी और देखभाल के अभाव में सूख चुके हैं। कर्मचारियों के लिए न तो उचित रहने की व्यवस्था है और न ही सुलभ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं। गौरतलब है की 15 महीने पहले बहुमूल्य सराई का पेड़ को काटकर , इस नर्सरी के अंदर गड्ढा खोद कर, दो बड़े-बड़े सराय का लठ, को नर्सरी के दक्षिण दिशा स्थित एक पुराने कुआं के पास मिट्टी के नीचे छिपा दिया था और चार लठ को बाहर छोड़ दिया गया था । चार बड़े-बड़े सराय का लठ को नर्सरी में देखने के बाद, एक पत्रकार के द्वारा आर टी आई के माध्यम से पता चला की कुछ लोगों के द्वारा उक्त पेड़ों का हिस्सा को लाकर नर्सरी में छुपाया गया था जिन पर बाद में करीबन 26000 रुपया का फाइन भी लगाया गया था और अपने कर्तव्यों का अवहेलना करने पर एक बीट गार्ड को सस्पेंड भी कर दिया गया था । लेकिन इस बात से पता चलता है कि चोरों के हौसले कितने बुलंद है जो सरकारी नर्सरी के अंदर गड्ढे खोद के बहुमूल्य सराई का पेड़ को छुपा सकते हैं, इससे वन विभाग की ईमानदारी पर शक जरूर होता है ।
जीब _जंतुओं के लिए डाबरी (छोटे जलाशय) में पानी की उपलब्धता राहत की बात है, जिससे गर्मियों में उन्हें जल स्रोत मिल सकेगा।
वन दिवस का संदेश: संरक्षण के लिए केवल बातें नहीं, ठोस कार्रवाई हो
वन दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को जंगलों के प्रति जागरूक करना और उनका संरक्षण सुनिश्चित करना है। लेकिन इस दिवस पर जंगलों की यह दुर्दशा देखना चिंताजनक है।
सरकार और वन विभाग को केवल नीतियों और योजनाओं तक सीमित न रहते हुए जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करनी होगी। वन कर्मचारियों को अधिक सतर्क रहना होगा, आग की घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर निगरानी व्यवस्था लागू करनी होगी, और लकड़ी तस्करों के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे।
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में हमारे जंगल केवल कागजों पर ही सुरक्षित रह जाएंगे। इस विषय पर न्यूज़ पेपर के लिए थोड़ा बहुत आगे पीछे करके न्यूज़ बनाईए
